✅ शीघ्रपतन और नपुंसकता: डरिए नहीं—समझिए, संभालिए, और सही दिशा में इलाज कराइए


 ✅ शीघ्रपतन और नपुंसकता: डरिए नहीं—समझिए, संभालिए, और सही दिशा में इलाज कराइए

बहुत से पुरुष ये सोचकर चुप रहते हैं कि “ये तो उम्र/कमज़ोरी की बात है”—लेकिन सच ये है कि

शीघ्रपतन (PE) और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (ED) दोनों ही बहुत आम समस्याएँ हैं, और सही कारण पकड़कर लाइफस्टाइल + माइंड + बॉडी तीनों पर काम किया जाए तो सुधार बहुत अच्छा आता है।

1) बीमारी क्या है? (मरीज की भाषा में)

शीघ्रपतन (Premature Ejaculation – PE)

●सेक्स के दौरान बहुत जल्दी स्खलन हो जाना,

●कंट्रोल कम होना,

●और इससे तनाव/परेशानी महसूस होना।

लाइफ-लॉन्ग PE में अक्सर पैठ के 1 मिनट के भीतर हो सकता है; acquired में पहले ठीक था, फिर बाद में समय घटने लगता है।

नपुंसकता/ED (Erectile Dysfunction)

इरेक्शन का न बन पाना, या

बनकर टिक न पाना (firmness कम),

जिससे संतोषजनक संबंध न हो पाय ।

2) मुख्य लक्षण (Symptoms)

PE के लक्षण

●बहुत कम समय में स्खलन

“कंट्रोल नहीं रहता”

●बार-बार असफलता का डर

●पार्टनर के सामने शर्म/गिल्ट

ED के लक्षण

●इरेक्शन कमजोर/अस्थिर

“मूड है लेकिन बॉडी साथ नहीं दे रही”

●सुबह का इरेक्शन कम होना

●आत्मविश्वास गिरना

◆लगातार ED कभी-कभी हार्ट/ब्लड-वेसल समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

3) ये समस्याएँ क्यों होती हैं? (Root Causes)

A) मानसिक/नर्वस सिस्टम कारण

●तनाव, एंग्जायटी, परफॉर्मेंस प्रेशर

●नींद की कमी

●डिप्रेशन/ओवरथिंकिंग

●रिलेशनशिप तनाव

B) शरीर/मेटाबॉलिक कारण

●डायबिटीज, हाई BP, मोटापा

●स्मोकिंग, अल्कोहल

●हार्मोन असंतुलन

●कम फिटनेस/कम एक्टिविटी

C) लोकल/यूरोलॉजी कारण

●prostatitis/urinary infection

●संवेदनशीलता बढ़ना (PE)

●कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट

(इसीलिए सही इलाज में कारण पकड़ना सबसे जरूरी है।) 

4) आयुर्वेद इस रोग में कैसे काम करता है? (Ayurvedic Perspective)

आयुर्वेद “सिर्फ एक गोली” नहीं देता—यह 3 स्तर पर काम करता है:

(1) दोष-संतुलन (Vata–Pitta–Kapha)

Vata असंतुलन: जल्दीपन, कंट्रोल की कमी, घबराहट, नींद खराब

Pitta असंतुलन: चिड़चिड़ापन, गर्मी, जल्दी उत्तेजना

Kapha कमी/धातु-क्षय: stamina/tonus कम

(2) धातु पोषण (खासकर शुक्ल धातु)

आयुर्वेद में शुक्ल धातु सिर्फ वीर्य नहीं—reproductive vitality + hormonal balance + tissue strength का संकेत है।

“पोषण” का मतलब: पाचन/अग्नि सुधार → धातु निर्माण → बल/ओज बढ़ना।

(3) माइंड–बॉडी रिलेशन

PE/ED में दिमाग की भूमिका बड़ी होती है। आयुर्वेद में

नींद, तनाव, दिनचर्या, भोजन, योग-प्राणायाम को इलाज का हिस्सा माना जाता है—इसी वजह से रूट लेवल पर काम होता है।

5) परहेज़ (क्या न करें) जिससे लक्षण जल्दी घटते हैं

●पूरी तरह Avoid/Minimize

●शराब/स्मोकिंग (खासकर रोज़)

●बहुत ज्यादा चाय-कॉफी/एनर्जी ड्रिंक

●देर रात जागना, लगातार स्क्रीन

●बहुत मसालेदार, फ्राइड, जंक फूड

●पोर्न की आदत (ज्यादा होने पर “performance anxiety” बढ़ती है)

●बार-बार जल्दी-जल्दी संबंध (कंट्रोल और नर्वस सिस्टम खराब होता है)

तुरंत सुधार के लिए 7-दिन का नियम

●रात में कम से कम 7–8 घंटे नींद

●रोज़ 30–40 मिनट वॉक

●फोन/स्क्रीन 1 घंटा पहले बंद

●2–3 दिन में ही “नर्वस सिस्टम” शांत होना शुरू करता है

6) क्या करें? (Daily Routine जो सबसे ज्यादा काम करता है)

सुबह जल्दी उठकर 

●गुनगुना पानी

●20–30 मिनट तेज वॉक/सूर्य नमस्कार

●30 मिनट अनुलोम-विलोम + भ्रामरी

●30 मिनट पेल्विक फ्लोर (Kegel) (धीरे-धीरे)

दिन में

●लंबे गैप का खाना न रखें (अग्नि बिगड़ती है)

●पानी पर्याप्त (लेकिन बहुत ठंडा नहीं)

रात

●हल्का डिनर (सोने से 2–3 घंटे पहले)

●10 मिनट स्ट्रेचिंग + धीमी सांस

●पार्टनर से बात (pressure कम होता है)

7) डाइट प्लान (Simple Indian Diet)

✅ फोकस: “पाचन सुधरे + धातु पोषण + नर्वस सिस्टम शांत”

Best Foods

Nut milk + थोड़ी मात्रा में मेवा

मूंग दाल, खिचड़ी

ओट्स/दलिया

केला, अनार, खजूर (मध्यम मात्रा)

तिल/अलसी (थोड़ी मात्रा)

सब्जियाँ: लौकी, तोरी, गाजर, चुकंदर, पालक (पकाकर)

Avoid Foods (खासकर PE/ED में)

बहुत तीखा/खट्टा

ज्यादा प्याज-लहसुन (कुछ लोगों में गर्मी/उत्तेजना बढ़ाती है)

बहुत ज्यादा तला-भुना

पैकेज्ड/कोल्ड ड्रिंक्स

एक आसान “दिन का नमूना”

Breakfast: दलिया/ओट्स + मेवा (थोड़ा)

Lunch: रोटी/चावल + दाल + सब्जी + सलाद (कम तीखा)

Evening: मखाना/फल

Dinner: मूंग दाल खिचड़ी/हल्का खाना

अगर शुगर/थायरॉइड/फैटी लिवर हो, तो डाइट कस्टमाइज करनी चाहिए। इसके लिए क्लीनिक में आइये।

8) आयुर्वेदिक मैनेजमेंट में क्या-क्या शामिल हो सकता है? 

आयुर्वेद में PE/ED के लिए अक्सर ये 4 चीज़ें कॉम्बिनेशन में की जाती हैं:

अग्नि/पाचन सुधार (गैस-कब्ज-एसिडिटी सुधरे तो libido और performance पर असर पड़ता है)

वाजीकरण/रसायन (ताकत, stamina, recovery)

मन-शांति/नींद सुधार (तनाव घटे तो PE में बड़ा लाभ)

जरूरत पर पंचकर्म/थेरपी सपोर्ट (डॉक्टर की जाँच के बाद)


10) कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? (Red Flags)

●अचानक ED शुरू हो गया हो

●छाती में दर्द/सांस फूलना/हार्ट रिस्क हो

●डायबिटीज अनकंट्रोल

●penile pain/curvature

●urine infection/जलन-बार बार पेशाब

●depression/बहुत ज्यादा anxiety

ED कभी-कभी कार्डियोवैस्कुलर समस्या का संकेत हो सकता है—इसलिए इसे ignore न करें। 

11) मरीजों का सबसे बड़ा भ्रम (और सच)

❌ “मेरे अंदर कमी है”

✅ सच: ये मेडिकल + लाइफस्टाइल + माइंड का कॉम्बिनेशन है, और ठीक किया जा सकता है।

❌ “बस एक ताकत की दवा ले लूं”

✅ सच: बिना कारण ठीक किए बार-बार समस्या लौटती है।

12) आरोग्यम आयुर्वेदी क्लिनिक, रुद्रपुर (उत्तarakhand) में हमारा अप्रोच

हमारा फोकस रहता है:

✅ Root-cause assessment (लाइफस्टाइल, नींद, तनाव, पाचन, मेडिकल हिस्ट्री)


✅ व्यक्ति-विशेष आयुर्वेदिक प्लान (दोष-अनुसार)


✅ डाइट + रूटीन + योग/प्राणायाम guidance


✅ जरूरत हो तो टेस्ट/रेफरल की सलाह (सुरक्षा के लिए)
लक्ष्य: सिर्फ “क्षणिक मदद” नहीं, बल्कि स्थायी सुधार + आत्मविश्वास की वापसी।


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