पथ्य–अपथ्य: स्वस्थ रहने का आयुर्वेदिक मार्ग
पथ्य–अपथ्य: स्वस्थ रहने का आयुर्वेदिक मार्ग सही भोजन, सही दिनचर्या और सही सोच से निरोग जीवन की ओर “स्वास्थ्य केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम बीमारी होने के बाद क्या खाते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि बीमारी से पहले हम रोज क्या खाते और कैसे जीते हैं।” आज के समय में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ वसा स्तर, हृदय संबंधी समस्याएं, कब्ज, अम्लता, पेट फूलना और अनेक जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं तेजी से दिखाई दे रही हैं। इनमें भोजन और दिनचर्या की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक निष्क्रियता अनेक दीर्घकालिक रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। स्वस्थ आहार में पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता को महत्व दिया जाता है। आयुर्वेद ने इस विचार को बहुत पहले “पथ्य” और “अपथ्य” के सिद्धांत के माध्यम से समझाया था। लेकिन पथ्य का अर्थ केवल “यह खाइए” और अपथ्य का अर्थ केवल “यह मत खाइए” नहीं है। आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति, पाचन शक्ति, दोषों की स्थिति, रोग, ऋतु, समय, मात्रा, आयु और जीवनशैली को ध्यान में रखकर ...